Posts

हमर जमाना मा

हमर जमाना मा - सियान मन ला पोठ डररावन   आज के विषय म गोठ आइस अपन जमाना के तव मोला अपन ननपन मा लइकापन के सोनहा सुरता मन के खियाल आथें । कि जब हमन छोटे राहन त घर के सियान का गाँव के सब बड़े ददा कका बाप मन ला घलो पोठ डररावत रहेन । काबर सियान तो सियान होथें घर के काहवँ चाहे बाहर के , वो समे के बात अलगे रिहिस हें । आज कल के लइका मन ला तो अपने दाई ददा मन घलो नइ बरज सकय , त बाहिर वाला मन के तो गोठ ही छोड़व । बचपन म तरिया नंदिया मन म नहाय के मजा अलगे रिहिस हे , मोला सुरता आथे हमर गाँव के नंदिया के जेमा हमन बिहनियाँ अउ मंझनिया पोठ डुबक - डुबक के नहावत रहेन । अउ तब सियान मन के बरजे मा ही निकल के घर आवत राहन तव कई दिन मार घलो खावत राहन ।  ओइसने दू जघा के सुरता मोला आवत हे ननपन के जब गाँव के एक झन सियान अउ स्कुल के गुरूजी ह हमन ला सोटियाय राहय । गरमी के दिन राहय अउ मंझनिया कुन हमन सबो संगी साथी जाके नंदिया के रेती मा खेलन अउ पोठ डुबक - डुबक के नहाँवन । वो समे नंदिया उथली रिहिस हें बड़ मजा आवय । एक दिन ओइसने नहाँवत राहन त हमर गाँव के एक झन बड़े ददा हमन ला देख डरिस अउ हमन निकल के कपड़ा लत्त...

धार्मिक आस्थायें बनाम धार्मिक षड्यंत्र

Image
धार्मिक आस्थायें बनाम धार्मिक षड्यंत्र  आज कल सोशल मीडिया से भरे इस डिजिटल युग में क्या क्या नही हो रहा है , और कब क्या हो जायें ये भी कुछ कहा नही जा सकता है । हम सभी देख रहे हैं आज कल लोगो में धार्मिक साम्प्रदायिक भावनाओं को लेकर लोगो ने क्या मानसिकता बना लिया है । जिसका खुमार आज सोशल मीडिया में एक बुखार की तरह छाया हुआ है । हम ये नही कहते कि यह गलत है नही होना चाहिए , बिल्कुल होना चाहिए भला अपना धर्म समाज एवं सम्प्रदाय किसको प्यारा नही होता है होना भी चाहिए । अब यहाँ पर सबसे बड़ा चिंतन का विषय यह आता है कि लोगो के मन में अन्य धार्मिक साम्प्रदायिक भावनाओं को लेकर इतनी कट्टरता क्रूरता एवं द्वेष की ये गंदी भावना आखिर लाता कौन है ? आखिर ये आता कहाँ से है ?  ऐसे ही कई प्रश्न चिन्ह आज हमारे पास ही मौजूद है मित्रों जिन पर आज हमे चिंतन करने की आवश्यकता है । सोशल मीडिया के चकाचौंध से भरे आज के इस समय में लोग सोशल मीडिया के भवँर में ऐसे फंसे हुये है , कि मानो वे जल्दीबाजी में कुछ समझ ही नही पाते है और बिना सोंचे समझें ही कुछ भी कर बैठते है । क्यों क्योंकि   विवेक ...