हमर जमाना मा
हमर जमाना मा - सियान मन ला पोठ डररावन आज के विषय म गोठ आइस अपन जमाना के तव मोला अपन ननपन मा लइकापन के सोनहा सुरता मन के खियाल आथें । कि जब हमन छोटे राहन त घर के सियान का गाँव के सब बड़े ददा कका बाप मन ला घलो पोठ डररावत रहेन । काबर सियान तो सियान होथें घर के काहवँ चाहे बाहर के , वो समे के बात अलगे रिहिस हें । आज कल के लइका मन ला तो अपने दाई ददा मन घलो नइ बरज सकय , त बाहिर वाला मन के तो गोठ ही छोड़व । बचपन म तरिया नंदिया मन म नहाय के मजा अलगे रिहिस हे , मोला सुरता आथे हमर गाँव के नंदिया के जेमा हमन बिहनियाँ अउ मंझनिया पोठ डुबक - डुबक के नहावत रहेन । अउ तब सियान मन के बरजे मा ही निकल के घर आवत राहन तव कई दिन मार घलो खावत राहन । ओइसने दू जघा के सुरता मोला आवत हे ननपन के जब गाँव के एक झन सियान अउ स्कुल के गुरूजी ह हमन ला सोटियाय राहय । गरमी के दिन राहय अउ मंझनिया कुन हमन सबो संगी साथी जाके नंदिया के रेती मा खेलन अउ पोठ डुबक - डुबक के नहाँवन । वो समे नंदिया उथली रिहिस हें बड़ मजा आवय । एक दिन ओइसने नहाँवत राहन त हमर गाँव के एक झन बड़े ददा हमन ला देख डरिस अउ हमन निकल के कपड़ा लत्त...